ढक्कन गाथा :
कल रात एक अनौपचारिक वार्तालाप के दौरान अपनी डायरी में लिखते हुए पेन की स्याही खत्म होते ही बाजू में बैठे युवक की तरफ अभिलाषा प्रकट करते हुए मैंने पूछा, मित्र एक अतरिक्त पेन हो तो देने की कृपा करो l आज इस आभासी और उन्नत दुनिया में दो पेन साथ रखना अपने आप में गौरव का विषय है, कुछ ही समय में वो मुझे पेन देते हुए बोला, आपकी किस्मत अच्छी है एक ही अतरिक्त था l लिखते लिखते जैसे ही पेन के ढक्कन पर मेरी नज़र पड़ी तो बचपन की यादें ताज़ा हो उठी, पेन के ढक्कन पर किसी सभ्य मानव ने अपने नुकीले दन्त की आकृति जो उकेर रखी थी l बचपन में ना जाने ऐसे कितने ही मित्र थे जो एक दूसरे का झूठा पानी तक नही पीते थे, पर अनजाने में ही अपने अपने दांतो से एक ही पेंसिल को आकर देने का प्रयास किया करते थे और अनजाने में ही एक अनकहा रिश्ता स्थापित कर लेते थे l कभी कभी कुछ ज्यादा समझदार मित्र पेंसिल के दोनो तरफ से लिखने की व्यवस्था करके चलते थे, अगर कहीं मांगने पर किसी को देनी भी पड़ जाये तो उस पेंसिल की अस्मिता बची रहे l इसमे गलती हम बच्चो की कहां थी वो तो हमे हमारे पूर्वजो से मिले संस्कार थे, पहले दांत साफ करने के लिए भी बबूल या नीम के दातुन का उपयोग किया जाता था, फिर समय के साथ तो गन्ने के रस को भी मशीन से निकालकर परोस दिया जाने लगा, फिर पेंसिल के साथ अत्याचार होना तो स्वाभिक सी ही बात थी l आज भी कई विद्यार्थियो की नोट बुक उनका इतिहास बयां कर देती है, कुछ तो पूरी चार साल की डिग्री एक ही नोट बुक में लिखते लिखते निपटा देते है, तो कुछ अपनी प्रेम कहानी की शायरियों को पीछे के प्रष्ठ से लिखते हुए नोटबुक के मध्य तक आ पहुँचते है l इस देश का वास्तव में ये अकल्पनीय प्रतिभा का वही युवा वर्ग है, जो हॉलीवुड के गाने का मतलब समझ ना आने पर भी उसे गुनगुनाता रहता है और किशोर कुमार को नज़रअंदाज़ कर जस्टिन बीबर में ही उलझा रहता है l

अरे माफ किजिएगा कहां बात पेन के ढक्कन पर थी और कहां हॉलीवुड के गाने तक आ पहुँची l हाँ तो जब मैंने उस पेन के ढक्कन पर अपनी सूक्ष्म दृष्टि से नज़र गड़ाई, तो उस ढक्कन को ध्यान से देखने पर उसकी ऐतिहासिक विरासत का अनुमान हो रहा था, उस पर गड़े दन्त चिन्हों को देखकर ही प्रतीत हो रहा था कि कितना दबाब और कितनी विवश्ता रही होगी उस छात्र की, तब जाकर उसने अपने मस्तिक के उच्चतम शिखर का दवाब अपने दांतों के माध्यम से उस ढक्कन पर प्रतिस्पादित किया होगा l छात्र जीवन में जब जब किसी छात्र पर ऐसी दुविधा आती है तब तब ऐसे ही ढक्कन उनके जीवन की कठनाईयों को अपने सर ले जाते है l वास्तविकता में कभी कभी विचार आता है तो लगता है, ना जाने कैसा होगा वैज्ञानिक न्यूटन के उस पेन का ढक्कन, कैसा होगा गैलीलियो और आइन्सटीन के वो पेन का ढक्कन, अगर तब किसी ने गंभीरता से विचार कर उन ढक्कनों को सहेज कर रख लिया होता तो शायद आज वो विश्व की वैश्विक धरोहर होते और फिर हम उस पर रेखांकित दन्त आकृतियों से ही उनके मस्तिक का दवाब खोज पाते और फिर अगर एक बार ये छात्र उनके मस्तक पर पड़ने वाले दवाब का अध्यन्न कर लेते, तो ना जाने आज इस विश्व में कितने ही और अविष्कार हो चुके होते l खैर होनी को कौन टाल सकता है, इतिहास तो बस भविष्य के सुन्हेंरे निर्माण की ही सीख दे सकता है, और अब जब ढक्कन की बात चल ही पड़ी है, तो आपको ज्ञात होगा कर्नाटक के चुनाव परिणाम भी आ चुके है, अगर कहीं आपके संपर्क से उस राष्ट्रीय पार्टी के ढक्कन के पेन का ढक्कन भी मिल सके तो मेरे शोध के लिए अत्यन्त ही गौरव का विषय होगा, आपकी एक कृतज्ञता इस देश में पैदा होने वाले अनेको ढक्कनों के भविष्य उज्ज्वल बनाने में भूमिका निभा सकती है l
अपना अमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद
सुयश
कल रात एक अनौपचारिक वार्तालाप के दौरान अपनी डायरी में लिखते हुए पेन की स्याही खत्म होते ही बाजू में बैठे युवक की तरफ अभिलाषा प्रकट करते हुए मैंने पूछा, मित्र एक अतरिक्त पेन हो तो देने की कृपा करो l आज इस आभासी और उन्नत दुनिया में दो पेन साथ रखना अपने आप में गौरव का विषय है, कुछ ही समय में वो मुझे पेन देते हुए बोला, आपकी किस्मत अच्छी है एक ही अतरिक्त था l लिखते लिखते जैसे ही पेन के ढक्कन पर मेरी नज़र पड़ी तो बचपन की यादें ताज़ा हो उठी, पेन के ढक्कन पर किसी सभ्य मानव ने अपने नुकीले दन्त की आकृति जो उकेर रखी थी l बचपन में ना जाने ऐसे कितने ही मित्र थे जो एक दूसरे का झूठा पानी तक नही पीते थे, पर अनजाने में ही अपने अपने दांतो से एक ही पेंसिल को आकर देने का प्रयास किया करते थे और अनजाने में ही एक अनकहा रिश्ता स्थापित कर लेते थे l कभी कभी कुछ ज्यादा समझदार मित्र पेंसिल के दोनो तरफ से लिखने की व्यवस्था करके चलते थे, अगर कहीं मांगने पर किसी को देनी भी पड़ जाये तो उस पेंसिल की अस्मिता बची रहे l इसमे गलती हम बच्चो की कहां थी वो तो हमे हमारे पूर्वजो से मिले संस्कार थे, पहले दांत साफ करने के लिए भी बबूल या नीम के दातुन का उपयोग किया जाता था, फिर समय के साथ तो गन्ने के रस को भी मशीन से निकालकर परोस दिया जाने लगा, फिर पेंसिल के साथ अत्याचार होना तो स्वाभिक सी ही बात थी l आज भी कई विद्यार्थियो की नोट बुक उनका इतिहास बयां कर देती है, कुछ तो पूरी चार साल की डिग्री एक ही नोट बुक में लिखते लिखते निपटा देते है, तो कुछ अपनी प्रेम कहानी की शायरियों को पीछे के प्रष्ठ से लिखते हुए नोटबुक के मध्य तक आ पहुँचते है l इस देश का वास्तव में ये अकल्पनीय प्रतिभा का वही युवा वर्ग है, जो हॉलीवुड के गाने का मतलब समझ ना आने पर भी उसे गुनगुनाता रहता है और किशोर कुमार को नज़रअंदाज़ कर जस्टिन बीबर में ही उलझा रहता है l

अरे माफ किजिएगा कहां बात पेन के ढक्कन पर थी और कहां हॉलीवुड के गाने तक आ पहुँची l हाँ तो जब मैंने उस पेन के ढक्कन पर अपनी सूक्ष्म दृष्टि से नज़र गड़ाई, तो उस ढक्कन को ध्यान से देखने पर उसकी ऐतिहासिक विरासत का अनुमान हो रहा था, उस पर गड़े दन्त चिन्हों को देखकर ही प्रतीत हो रहा था कि कितना दबाब और कितनी विवश्ता रही होगी उस छात्र की, तब जाकर उसने अपने मस्तिक के उच्चतम शिखर का दवाब अपने दांतों के माध्यम से उस ढक्कन पर प्रतिस्पादित किया होगा l छात्र जीवन में जब जब किसी छात्र पर ऐसी दुविधा आती है तब तब ऐसे ही ढक्कन उनके जीवन की कठनाईयों को अपने सर ले जाते है l वास्तविकता में कभी कभी विचार आता है तो लगता है, ना जाने कैसा होगा वैज्ञानिक न्यूटन के उस पेन का ढक्कन, कैसा होगा गैलीलियो और आइन्सटीन के वो पेन का ढक्कन, अगर तब किसी ने गंभीरता से विचार कर उन ढक्कनों को सहेज कर रख लिया होता तो शायद आज वो विश्व की वैश्विक धरोहर होते और फिर हम उस पर रेखांकित दन्त आकृतियों से ही उनके मस्तिक का दवाब खोज पाते और फिर अगर एक बार ये छात्र उनके मस्तक पर पड़ने वाले दवाब का अध्यन्न कर लेते, तो ना जाने आज इस विश्व में कितने ही और अविष्कार हो चुके होते l खैर होनी को कौन टाल सकता है, इतिहास तो बस भविष्य के सुन्हेंरे निर्माण की ही सीख दे सकता है, और अब जब ढक्कन की बात चल ही पड़ी है, तो आपको ज्ञात होगा कर्नाटक के चुनाव परिणाम भी आ चुके है, अगर कहीं आपके संपर्क से उस राष्ट्रीय पार्टी के ढक्कन के पेन का ढक्कन भी मिल सके तो मेरे शोध के लिए अत्यन्त ही गौरव का विषय होगा, आपकी एक कृतज्ञता इस देश में पैदा होने वाले अनेको ढक्कनों के भविष्य उज्ज्वल बनाने में भूमिका निभा सकती है l
अपना अमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद
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