Friday, May 18, 2018

दस_बाय_दस

दस_बाय_दस:

लड़को का रूम भी किसी गृहस्त व्यक्ति को दिखाने के लिए पुरात्तव विभाग के बने किसी म्यूजियम से कम नही होता l दस बाय दस का वो कमरा, जिसमे पलंग पर पड़ा वो गद्दा शायद आपने अस्तित्व में आने से लेकर वर्तमान तक बिना धुले ही संघर्ष करता रहता है l एक दो बिछाने की चादर और सामान्यतः एक ओढने वाले कम्बल के बल पर ही एक छात्र अपना पूरा छात्र जीवन व्यतीत कर देता है l रूम के किसी कोने में बने सिंक में सड़ रहे बर्तन भी तभी साफ होते है, जब या तो चाय का वक़्त हो या फिर भूख शांत करने के लिए कुछ खाने की लालसा l जब कोई लड़का किसी छोटे शहर से बड़े शहर की तरफ कूच करता है, तब उसकी सामान्यतः चर्चाओं का विषय क्रिकेट या फिर कोई बॉलीवुड की फिल्मे होती है l पर जब वो कुछ महीनों बाद अपने घर लौटता है, तब उसे ज्ञात रहता है कि इस धरती को ब्रम्हांड की किन किन शक्तियों से खतरा है और उसे बचाने हेतु दस बारह नमूनों की फौज अपना सर्वत्र निछावर कर रही है, उसे अब इस मानवी दुनिया के अलावा एक ऐसी दुनिया का भी ज्ञान हो जाता जहां जानवर बोला करते है, अब उसे मिश्र में हुए देवताओ और राजाओं के युद्ध का भी भान रहता है, कैसे कालचक्र में आठ मिनट पीछे जाकर दुर्घटनाग्रस्त हुई ट्रेन को बचाया जा सकता है वो इस पर भी विचार करने लगता है और कभी कभी तो घर में पड़ी झाड़ू को अपनी टांगो के बीच फसा वो अपने सपनो की उड़ान भी भर लेता है l बात की जाये तो उसके जीवन में आये इस परिवर्तन का उसे भान ही नही रहता l रूम में दोस्तो के बीच किसी सामाजिक मुद्दे पर बात करते करते किसी एक राजनैतिक पार्टी का समर्थन करते हुए वो कब उस पार्टी के लिए डोर टू डोर प्रवक्ता बन जाता है उसे पता भी नही चलता l फेसबुक पर स्वच्छ भारत की फोटो शेयर करने वाले ये लड़के अपने रूम की बाथरूम में स्वच्छ्ता की धज्जिया उड़ाते हुए मिला करते है l घर पर जो लड़का मुश्किल से ईयरफोन लगा एक दो गाने सुना करता था, अब वो अपने मोबाइल में वूफर लगा अपने रूम के बदलते तापमान के हिसाब से गाने बदलने लगता है l थोड़ा धार्मिक माहौल में पला बड़ा हुआ हो तो शुरुवात भगवान के किसी गाने से ही कर देता है, पर नहाते समय उसकी पसंद का कोई नया या फिर इंग्लिश का ही कोई गाना बजता है और सोते समय तो उसकी फरमाइश कुमार सानू से लेकर सोनू निगम तक हो जाती है l यह वही दौर भी रहता है जहां उसकी मुलाकात चेतन भगत से लेकर अश्विन सांघी की किताबों से भी होती है, पहले जो लड़का कभी ट्रेन की खिड़किया झांकते हुआ शहर में प्रवेश करता है, आज वो ट्रेन में बैठकर अपने हाथ में पकड़ी किताब के अलावा उन खिड़कियों के बाहर भी देखना पसंद नही करता l वास्तव में परिवर्तन प्रकृति का नियम है, जीवन में एक के बाद एक नए दरवाजे खुलते ही जाते है, जहां से रोज़ एक नया प्रकाश हमारे जीवन में प्रवेश करता है l वो लड़को का दस बाय दस का कमरा उनका रूम नही होता वो उनकी जीवन में बनने वाले महल की नीव होता है l निर्णय उस लड़के को करना होता है की उसे अपनी नीव कैसी डालनी है, हमारे देश के लड़को का रूम वास्तव में नासा वालो के लिए एक शोध का विषय होना चाहिए और हाँ अगर भविष्य में आपके घर कोई मेहमान आये और आप उन्हें कहीं घुमाने जाये अथवा नही जाये, पर किसी लड़के का रूम लेजाकर उन्हें जरूर दिखाना चाहिए l
©सुयश

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