इस देश की जनता के ज़हन मे एक सवाल हमेशा ही रहेगा, कि आखिर इस देश का उच्च न्यायालय रात 12 बजे क्यों खोला गया था, क्या याकूब मेंमन एक आतंकवादी था, क्या एक पढ़ा लिखा व्यक्ति इतना कठिन परिश्रम कर, सी.ए जैसा मुकाम हासिल करने के बाद एक आतंकवादी बन सकता है ! जबाब है- हाँ वो एक आतंकवादी था l
ऐसे ही ना जाने अनेक सवाल इस देश की जनता के मस्तक मे आये होंगे, और लगभग हर सवाल का जबाव मीडिया पर इस विषय के निरंतर प्रसारण से लोगो को मिल ही गया होगा l
पर आज भी कुछ लोगो के ज़हन मे एक सवाल रुक-रुक कर आ रहा है , कि इस देश का व्यक्ति चाहे वो किसी भी धर्म से ताल्लुक क्यूं ना रखता हो, उसकी ऐसी कौन सी मजबूरी रहती है जो उसे आतंकवाद का रास्ता अपनाना पडता है, क्यूं एक व्यक्ति सी.ए जैसा विशेषज्ञ होने के बाद एक आतंकवादी बन जाता है और २७२ लोगो की मौत का कारण भी ?
ये कुछ ऐसे सवाल है जिनका जिक्र शायद ही किसी अखबार या मीडिया जगत मै हुआ हो, इन सभी सवालों का एक ही जबाब आता है हमारी शिक्षा पद्धति मे खामियां, व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो , जरूरी नहीं की उसे धर्म के नाम पर सही शिक्षा दी जा रही हो, क्योकि एक ही विषय को पढ़ने और पढ़ाने के कई दष्टिकोण हो सकते है।
हमारा देश एक ऐसी शिक्षा पद्धति क्यो नही अपना पा रहा है ,कि बच्चो को उनके बचपन से ही राष्ट्रवाद की शिक्षा मिले जिससे वे सही और गलत मे फर्क करने लायक हो जाए. आज लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी देश के प्रति अपना नजरिया नही रख पाते है इन्ही वजह से याकूब जैसे लोग सी.ए हेकर भी आतंकवादी बन जाते है! याकूब ने इंस्टीटूयट आँफ चार्टड अकाउंटेट आँफ इंडिया से पढाई करी , इस संस्था के नाम का अंतिम शब्द इंडीया है मतलब भारत, पर क्या वो खुद को भारतीय समझता था अगर समझता होता तो शायद मुंबई मे ऐसा ना हुआ होता ! सी.ए बनकर वो टेक्स और लाँ जैसै विषयो का विशेषज्ञ तो बन गया था पर क्या उसमे देश के प्रति राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत हुई थी, क्या उसे यह देश अपना देश लगता था, जबाब है - नही!
आज इस देश के तमाम राजनेता और विशेषज्ञ ,माओवाद उग्रवाद और आतंकवाद जैसी बढ़ी समस्याओं का एक ही कारण मानते है असाक्षरता .
जब तक इस देश का हर व्यक्ति भारत को माता के रूप मे ना देख कर मात्र एक देश के रूप मे देखते रहेगा तब तक इस प्रकार की समस्याएं निरंतर ही आती रहेगी. आज जरूरत है कि हम विभिन्न विषयों की शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रवाद की शिक्षा भी जरूर दें, जिससे फिर कोई पढ़ा लिखा नौजवान एक आतंकवादी न बन जाए और फिर हमे कभी किसी और याकूब को फाँसी के फंदे पर ना चढ़ाना पड़े।
याकूब का आतंकी होना इन सभी के ज्ञान पर प्रश्न चिन्ह है l कि क्यूं एक उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान आतंकी बनता है, मै इसे हमारे देश की शिक्षा पद्धति की बड़ी विफलता मानता हूँ !
- सुयश त्यागी

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